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Saturday, June 13, 2009

हर कोई है बीजी, मैं लेजी क्यों ?

हर कोई है बीजी, मैं लेजी क्यों ?
लोग फ्रेश - फ्रेश रहते हैं, मैं dizzy क्यों?

कौंध रहा अंतर्मन में ।

विचार-शून्य गगन में।

चिंतन और मनन में।

अपने मन के आंगन में।

वन में उपवन में।

काली घटा सावन में।

चूड़ी में , कंगन में।

जीवन और मरण में ।

रज-रंजित चरण में।

धरती के कण - कण में।

प्रभु के शरण में ।

हर कोई है fizzy , मैं frenzy क्यों?
इन्द्रधनुष सबका जीवन, मेरा greasy क्यों ?

तुने क्या कमाल किया !

ऐसा है तुने सवाल किया ।

विक्रम और बैताल किया ।

जीवन को तूने ऐसे जिया ।

जैसे हो कोई बूझता दिया ।

धीमा जीवन-रथ चाल किया ।

ख़ुद को इसमे ढाल लिया।

संकट ख़ुद विकराल किया।

मुश्किल बढ़ी , सवाल किया ?

बिन मतलब, बवाल किया !

बेचारे सा हाल किया ।

सबका लाइफ क्रिस्टल-क्लेअर , मेरा hezy क्यों?
जीवन सबका बसंती - बयार , मैं fuggy क्यों?

माना गलती थी मेरी।

सम्हलने में की देरी।

बादल घोर-घनेरी ।

निशा घुप्प-अँधेरी ।

सहचर-सखा सब वैरी।

लोचन अश्रु-जल तैरी ।

संकीर्ण सोच थी मेरी ।

जब-जब विपदा ने घेरी ।

सुनते ही रणभेरी

मन बना क्यों लक्कड़- ढेरी ।

क्या इतनी हो गई देरी ?

दुनिया कितनी कांफिडेंट दिखती , मैं edgy क्यों?
सबका जीवन समतल भूमि, मेरा ridgy क्यों?

मैंने है मन में ठाना।

मुझको है नाम कमाना ।

जाने सारा जमाना ।

चाहू ऐसा काम कर जाना ।

हर कोई हो मेरा दीवाना।

बच्चा, बुढ्ढा, सयाना ।

मन, ऐसी तरकीब बताना ।

मिल जाए खुशियों का खजाना ।

अब , मन में जो है ठाना।

उसे हर कीमत पे है पाना।

ठीक- ठीक समझाना।

लोग लाइफ को सीरियस लेते , मैं easy क्यों?
दुनिया indiscriminative, मैं choosy क्यों?

कठिन परिश्रम से जो ना डरता।

लापरवाही, जो न बरतता।

ख़ुद को है जो प्रेरित करता।

हाय री किस्मत, जो ना करता ।

सही समय की प्रतीक्षा करता ।

समय सभी घावों को भरता ।

स्वस्थ अपने तन- मन को रखता ।

निरोग मनुष्य सब सम्भव करता ।

सकारात्मक विचार हो रखता ।

सफलता उसके चरण पखारता ।

प्रगति की वो सीढिया चढ़ता ।

तुम भी सफलता पा लोगे , हो crazy क्यों?
Take it easy! life is rosy!! तुम uneasy क्यों?

---सतीश राज पाठक

(रचना की प्रशंषा के लिए आप साबका आभार , आपके प्रशंषा के दो शब्द मेरे लिए प्रेरणा के श्रो़त हैं - धन्यवाद् )